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ट्यूनीशिया के राजनीतिक गुटों ने अफ्रीकी महाद्वीप में इस्राईल की सक्रियता के प्रति चेतावनी दी है।

ट्यूनीशिया में अंसारे फिलिस्तीन संगठन और कुछ दूसरे गैर सरकारी संगठनों ने एक बैठक का आयोजन करके अफ़्रीकी महाद्वीप में ज़ायोनी शासन की सक्रियता के प्रति चेतावनी दी है, और विभिन्न देशों से मांग की है कि अफ्रकी महाद्वीम में ज़ायोनी शासन द्वारा अपनी पैठ के बढ़ाए जाने के लिए की जाने वाली कोशिशों से मुकाबले के लिए उठ खड़े हों

इस बैठक का आयोजन तब किया गया है कि जब ज़ायोनी शासन के अधिकारी विभिन्न अफ्रीकी देशों के साथ संबंध बढ़ाने के लिए कोशिश कर रहे हैं। और इसके लिए पिछले कुछ महीनों में इस्राईली अधिकारियों ने बहुत अधिक सक्रियता दिखाई है।

ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री नेतनयाहू की चार अफ्रीकी देशों की यात्रा और अफ़्रीकी- इस्राईली कान्फ्रेंस के आयोजन के लिए कोशिश करना इसी कदम का एक हिस्सा है।

अफ्रीकी महाद्वीप में ज़ायोनी शासन द्वारा पैठ की कोशिशों की राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा और सैन्य जैसे विभिन्न स्तरों पर समीक्षा किए जाने की ज़रूरत है।

राजनीतिक आधार पर ज़ायोनी शासन के अधिकारी यह कोशिश कर रहे हैं कि अफ्रीका के कुछ देशों के साथ बड़े पैमाने पर संबंध बना कर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में उनके स्थान और वोट के अधिकार को अपने हित में प्रयोग कर सके।

तेल अवीव द्वारा अफ्रीका में प्रभाव बनाने की कोशिशों की समीक्षा

क्षेत्र में तेल अवीव की अमानवीय राजनीति और शत्रुता पूर्ण आक्रमण के सबक सामने आ जाने के बाद इस्राईल को न केवल अपनी संवैधानिकता के संकट को समाप्त करने के लिए अफ्रीकी देशों के साथ संबंध बढ़ाने के लिए विवश होना पड़ा है, बल्कि इस महाद्वीप के कुछ देशों द्वारा फिलिस्तीनी महत्वाकांक्षा के कट्टर समर्थन के कारण इस्राईल इस कोशिश में है कि इस क्षेत्र में एक इस्राईल विरोधी मोरचे को गठन को रोक सके।

आर्थिक आधार पर भी अफ्रीकी देशों में निवेश के बेहतरीन मौकों और बढ़ती अर्थ व्यवस्था के परिद्रश्य, खानों और प्राकर्तिक पदार्थों की मौजूदगी, ऊर्जा के असीमित स्रोत और इस महाद्वीप में बहुत से देशों के स्ट्रैटेजिक स्थान के कारण यह महाद्वीप इस्राईल के लिए बहुत महत्व रखता है।

यही कारण है कि इस्राईल की बहुत सी कंपनियां बहुत समय से इन देशों में विभिन्न आर्थिक परियोजनाओं में लगी हुई हैं।

वास्तव में इस्राईली अधिकारियों ने अफ्रीकी देशों के आर्थिक संकट, विकास के न होने, गरीबी और बेकारी से लाभ उठाया है और विभिन्न आर्थिक योजनाओं जैसे खेती, पानी और बिजली के उत्पादन क्षेत्र में लगे हुए हैं।

फ्रांस में इस्राईली राजदूत एलीज़ा बिन नून (Aliza Bin- Noun) इस्राईल और अफ्रीकी देशों के बीच जारी व्यापार विनिमय जिसके बारे में 1 अरब 200 मिलयन डालर के आंकड़े बयान किए जाते हैं, कहाः इस्राईली कंपनियां विभिनन्न क्षेत्रों जैसे अक्षय ऊर्जा, संचार, खेती और चिकिस्ता क्षेत्र में उपस्थित हैं।

सैन्य और सुरक्षा संबंधों को बढ़ावा देना भी इस्राईली अधिकारियों द्वारा अफ्रीकी देशों में उपस्थिति बढ़ाने का एक कारण है। इस्राईली अधिकारी कोशिश कर रहे हैं कि अफ्रीकी महाद्वीप में उपस्थिति को अपने सैन्य और सुरक्षा हितों के लिए प्रयोग करें।

हथियार और युद्ध संसाधनों की बिक्री, विभिन्न देशों की सेना को ट्रेनिंग देने के बहाने सैनिक की उपस्थिति, सैन्य अड्डों का वजूद, इस्राईल के लिए अफ्रीकी महाद्वीप के महत्व को दर्शाता है।

तेहरान में फिलिस्तीन इस्लामी प्रतिरोधी बल (हमास) के प्रतिनिधि ने इस बारे में कहाः “हम ज़ायोनी शासत के काले व्यापार को आज अफ्रीका और दूसरे देशों में देख रहे हैं।”

अगरचे इस्राईली अधिकारी अब भी अफ्रीकी महाद्वीप में अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं लेकिन अधिकतर अफ्रीकी देशों पर दूसरों के आक्रणम और अत्याचार के विरुद्ध विशेष प्रकार की उनकी प्रतिक्रिया के इतिहाश और दूसरी तरफ ज़ायोनी शासन की वास्तविकता के सामने होने के कारण यह शासन अफ्रीका में अपनी नीतों को लागू नहीं कर सकता है।

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