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यह सारी बहस और शोर शराबा इस्राईल की ताक़त का चिन्ह नहीं बल्कि उस पर छाए भय और कंपकपी की निशानी है जो अब हिस्टीरिया के स्तर पर बढ़ चुकी है। इसका कारण यह है कि ड्रोन विमान अलजलील इलाक़े तक आ गया और सीरिया ने आधुनिक मिसाइलों के बजाए अपने पुराने मिसाइल से जिसका प्रयोग 1970 के दशक में ही समाप्त हो चुका है, इस्राईल के एफ़-16 युद्धक विमान को अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की सीमा के भीतर मार गिराया।

इस्राईल के अत्याधुनिक युद्धक विमान एफ़-16 का मार गिराया जाना बहुत महत्वपूर्ण मोड़ है इससे हमें उस घटना की याद आती है जिसमें सोवियत संघ ने ज़मीन से हवा में मार करने वाले मिसाइल एस-75 से अमरीका के जासूसी विमान यू-2 को मई 1960 में मार गिराया था जब दोनों सुपर पावरों के बीच मुक़ाबला अपने चरम बिंदु पर था। उस समय अमरीका में आइज़नहावर और सोवियत संघ में ख़्रुशचोफ़ की सरकार थी। अमरीका का जासूसी विमान गिराया गया तो इससे अमरीका को अरबों डालर का नुक़सान हुआ क्योंकि अमरीका को यह जासूसी विमान ग्राउंड करने पड़े और इनकी जगह पर नए जासूसी विमानों का निर्माण करना पड़ा जिसके राहस्य सोवियत संघ के पास न हों।

अरब जगत में यह तीसरा एफ़-16 युद्धक विमान गिराया गया है। पहला विमान यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने गिराया जो मोरक्को का था और सऊदी अरब की ओर से यमन पर हमले कर रहा था। दूसरा एफ़-16 विमान जार्डन का गिराया गया जिसे पायलट मआज़ अलकसासबा उड़ा रहे थे। यह विमान दाइश ने इराक़ की सीमा में गिराया था। तीसरा एफ़-16 युद्धक विमान इस्राईल का गिरा है जिसे सीरिया के मिसाइल ने निशाना बनाया है।

जार्डन और मोरक्को के जो युद्धक विमान गिराए गए वह पुराने वरजन के थे जबकि इस्राईल का एफ़-16 युद्धक विमान अत्याधुनिक था अतः इसके गिर जाने से विश्व मंडी में एफ़-16 युद्धक विमानों की मांग पूरी तरह गिर जाएगी। जैसे हिज़्बुल्लाह लेबनान के मिसाइलों ने इस्राईल के मिरकावा टैंक की मार्केट ख़त्म कर दी थी जो जर्मनी के लियुबर्ड और अमरीका के अबराम टैंकों को विश्व मंडियों में कड़ी टक्कर दे रहा था।

ईरान हरगिज़ सीरिया से बाहर नहीं निकलेगा क्योंकि सीरिया की सरकार ने उसे दावत देकर बुलाया है और ईरान ने छह साल तक युद्ध किया है और भारी जानी व माली क़ुरबानियां दी हैं तथा सीरिया की सरकार को बचाए रखने में बुनियादी भूमिका निभाई है इस तरह सीरिया के ख़िलाफ़ अमरीका और क्षेत्रीय देशों की बड़ी भयानक और अपूर्व साज़िश नाकाम हो गई।

इस्राईली अधिकारी जो धमकियां दे रहे हैं यदि थोड़ी देर के लि हम उन्हें गंभीरता से ले भी लें तो और यह मान लें कि ईरान और इस्राईल के बीच युद्ध होने वाला है तो सवाल है कि यह युद्ध कहां होगा? इसके दो ही जवाब हैं।

एक तो यह कि इस्राईल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष टकराव हो दूसरे यह कि सीरिया या लेबनान की धरती पर छद्म युद्ध लड़ा जाए।

पहले विकल्प की संभावना नहीं के बराबर है क्योंकि ईरान अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन से 2000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित है और यदि इस्राईल के पास इतनी हिम्मत और ताक़त होती कि ईरान के प्रतिष्ठानों पर हमला करे तो वह अब तक कर चुका होता। अतः यह लगता है कि टकराव सीरिया या लेबनान की धरती पर हो सकता है। मगर यह टकराव हुआ तो भी इसके बड़े ख़तरे हैं।

पहली चीज़ तो यह है कि इस्राईल को रूस इस बात की अनुमति नहीं देगा कि सीरिया की धरती पर उसने जो सफलताएं हासिल की हैं उन्हें ख़त्म कर दे और दूसरी बात यह है कि इस्राईल ने हमला किया तो उसके अपने हर क्षेत्र पर मिसाइलों की बरसात शुरू हो जाएगी और कोई भी शहर पूरी तरह ध्वस्त हुए बग़ैर नहीं रहेगा। क्योंकि जब ईरान का ड्रोन विमान जैसा कि इस्राईल दावा कर रहा है वायु सीमा को तोड़ते हुए भीतर घुसा और बिन गोरियन हवाई अड्डे को घंटों बंद रखना पड़ा और हैफ़ा और तेल अबीब में अपात शरण स्थानों को खोलना पड़ा। और इसी जाल में फंसाकर इस्राईल के एफ़-16 विमान को ध्वस्त कर दिया गया तो फिर उस समय क्या होगा जब लेबनान, सीरिया, ईरान और ग़ज्ज़ा पट्टी से इस्राईली शहरों पर मिसाइलों की टिड्डी सेना टूट पड़ेगी? तीसरी चीज़ यह है कि इस समय सीरिया की सेना हालिया कई साल के युद्ध से ज़बरदस्त अनुभव प्राप्त करके युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। सीरियाई सेना के पास इस समय जितना अनुभव है उतना अनुभव उसके पास नहीं था।

ईरान को सीरिया के भीतर थल, वायु या नौसैनिक ठिकाने बनाने की ज़रूरत ही नहीं है सीरिया ने तो अपने दरवाज़े ईरान के लिए खोल दिए हैं। इसी तरह पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले स्वयंसेवियों के लिए भी सीरिया ने दरवाज़े खुले रहे हैं जिन्होंने सीरियाई जनता और सरकार की अतुल्य सेवा की है।

इस्राईल के एफ़-16 युद्धक विमान को ध्वस्त कर दिए जाने की घटना में अभी और भी चौंकाने वाली बातें सामने आएंगी। पुराने मिसाइल से इस्राईली विमान को गिराकर यह संदेश दिया गया है कि आधुनिक मिसाइलों के हमले इस्राईल नहीं झेल पाएगा अतः अपनी औक़ात में रहे वरना उसे पाषाण युग में भेज दिया जाएगा।

इस्राईल के पास हो सकता है कि बड़ा शस्त्रागार हो लेकिन वह ईरान को तबाह नहीं कर सकता जो उससे पचास गुना अधिक बड़ा है लेकिन ईरान और उसके घटक इस्राईल को पूरी तरह ध्वस्त कर सकते हैं। अरबों के साथ युद्ध में अपनी वायु शक्ति का प्रयोग करके इस्राईल के युद्ध जीत लेने का ज़माना बीत चुका है। अब तो ईरान, सरिया, लेबनान और फ़िलिस्तीन के गठजोड़ की विजय का ज़माना है।

इस्राईली विमान मार गिराए जाने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि अरब जगत में जनता के स्तर पर मनोबल बहुत बड़ गया है। इस्राईल और अमरीका से लड़ने वाले इस्लामी प्रतिरोधक मोर्चे का आत्मा विश्वास और बढ़ गया है

यदि युद्ध छिड़ता है तो यह इस्राईल की परीक्षा होगी कि वह अपना अस्तित्व बचा पाएगा या नहीं? ईरान, सीरिया, लेबनान, और फ़िलिस्तीन का जहां तक सवाल है तो उनकी जड़े बहुत गहराई तक फैली हुई हैं और वह हज़ारों साल से इस इलाक़े में मौजूद हैं।

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